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लोकतंत्र में सवाल पूछना देशद्रोह नहीं, नागरिक का अधिकार है — सोनम वांगचुक जी, कृपया अपना आमरण अनशन

 लोकतंत्र में सवाल पूछना देशद्रोह नहीं, नागरिक का अधिकार है — सोनम वांगचुक जी, कृपया अपना आमरण अनशन


जेडीयू नेत्री शालिनी सिंह पटेल ?



 समाप्त कीजिए। सोनम वांगचुक जी, आप इस देश के कोहिनूर हैं। आपने अपना पूरा जीवन देश, समाज, शिक्षा, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए समर्पित किया है। आपसे हाथ जोड़कर विनम्र आग्रह है कि कृपया अपना आमरण अनशन समाप्त कर दीजिए। आपका जीवन इस देश के लिए बेहद अनमोल है। हो सकता है कि आज सत्ता में बैठे लोग आपकी पीड़ा और आपके संघर्ष का महत्व न समझ रहे हों, लेकिन पूरा देश और पूरा विश्व आपके योगदान का सम्मान करता है। 18 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। आखिर लोकतंत्र में जनता की आवाज़ कब सुनी जाएगी? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अपने हक और अधिकार की मांग करना अब इस देश में अपराध हो गया है? क्या शांतिपूर्ण आंदोलन करना, अनशन करना और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना देशद्रोह है? यदि कोई बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेपर लीक, भ्रष्टाचार, पर्यावरण, किसानों और युवाओं के भविष्य की बात करे तो उसे विपक्षी, देशविरोधी या देशद्रोही कह दिया जाता है। आखिर क्यों? क्या पढ़े-लिखे नागरिकों का सवाल पूछना गुनाह है? लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है, जनता सरकार के प्रति नहीं। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कहा था, "सत्ता का खेल तो चलेगा, सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, मगर यह देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।" आज इस विचार को याद करने की सबसे अधिक आवश्यकता है। लोकतंत्र की असली ताकत संवाद, असहमति का सम्मान और जनता की आवाज़ सुनने में है, न कि सवाल पूछने वालों को देशद्रोही कहकर चुप कराने में। उम्मीद है सरकार अहंकार छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाएगी और लोकतंत्र की मर्यादा का सम्मान करेगी।

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