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फतेहपुर में धान रोपाई के पीक सीजन में नहरें सूखीं, हजारों किसानों के सामने संकट; आंदोलन की चेतावनी।
असोथर /फतेहपुर
धान रोपाई के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय में सिंचाई विभाग के एक फैसले ने फतेहपुर के हजारों किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। सुजानपुर रजबहा समेत क्षेत्र की कई माइनरों में अचानक पानी बंद होने से खेतों में तैयार धान की बेड़ (पौध) सूखने की कगार पर पहुंच गई है। मजदूर खेतों में खड़े हैं, खेत तैयार हैं, लेकिन नहरें पूरी तरह सूखी पड़ी हैं। किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना के 15 दिन की रोस्टिंग लागू कर पानी रोक दिया है, जिससे लाखों रुपये की फसल दांव पर लग गई है।
मंसूरी धान की खेती पर संकट, सूख रही बेड़ सुजानपुर रजबहा क्षेत्र को मुख्य रूप से मंसूरी धान का गढ़ माना जाता है, जिसकी रोपाई अनिवार्य रूप से जुलाई के महीने में ही की जाती है। किसानों ने बताया कि जैसे ही रोपाई का काम रफ्तार पकड़ने लगा, वैसे ही नहर का पानी बंद कर दिया गया। पानी न मिलने से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है और किसानों द्वारा खून-पसीना बहाकर तैयार की गई धान की बेड़ दम तोड़ रही है। किसानों का गंभीर आरोप: हमारे हक का पानी दूसरे क्षेत्रों में भेजा जा रहा स्थानीय किसान दिनेश प्रताप सिंह, प्रमोद सिंह, शैलेश सिंह, सोनू सिंह, हरवंश सिंह और रामसुमेर मौर्य ने सिंचाई विभाग पर भेदभाव और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि
पानी की हेराफेरी: स्थानीय जरूरतों को दरकिनार कर नहर का पानी खागा तहसील के धाता क्षेत्र और कौशाम्बी जिले की ओर डाइवर्ट किया जा रहा है।
सफाई में लापरवाही: निचली गंगा नहर की समय पर सिल्ट-सफाई (गाद और झाड़ियों को हटाना नहीं कराई गई, जिससे पानी का प्रवाह पहले ही बेहद धीमा था।
अधिकारियों का अड़ियल रवैया: जब इस संबंध में अधिकारियों से शिकायत की जाती है, तो वे केवल 'रोस्टिंग' का रटा-रटाया हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। किसानों का तीखा सवाल: "धान रोपाई के इस सबसे अहम समय में पानी बंद करने का आत्मघाती निर्णय किसके हित में लिया गया? अगर हमारी फसलें बर्बाद हुईं, तो इसकी जिम्मेदारी कौन सा अधिकारी भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस गंभीर मुद्दे पर भाकियू (अराजनैतिक) ने भी मोर्चा खोल दिया है। असोथर ब्लॉक महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कड़े शब्दों में कहा:
"धान रोपाई के समय नहर बंद करना किसानों के पेट पर लात मारने जैसा है। पानी न मिलने से किसानों का लेव (जोताई) खराब हो रहा है। विभाग को तुरंत हेड खोलकर पानी छोड़ना चाहिए। अगर सिंचाई विभाग ने अपना यह जनविरोधी फैसला तुरंत नहीं बदला, तो भारतीय किसान यूनियन किसानों के साथ मिलकर नहर विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।"
जिम्मेदारों का बयान: "हम तो आदेश का पालन कर रहे हैं"
जब इस पूरे मामले पर नहर विभाग के अवर अभियंता (जेई) विकास सिंह से बात की गई, तो उन्होंने अपनी लाचारी जताते हुए कहा:
उच्चाधिकारियों के सख्त निर्देश पर ही रोस्टिंग व्यवस्था के तहत संबंधित हेड को बंद किया गया है। विभाग फिलहाल तय रोस्टिंग शेड्यूल के अनुसार ही जलापूर्ति संचालित कर रहा है।
किसानों की मुख्य मांगें:
सुजानपुर रजबहा और संबंधित माइनरों में तत्काल हेड खोलकर पानी छोड़ा जाए।
नहरों की अधूरी पड़ी सफाई व्यवस्था को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए।
रोस्टिंग के इस अव्यावहारिक शेड्यूल को धान रोपाई तक तुरंत स्थगित किया जाए।

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