अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा और चढ़ावा चोरी के आरोपों में शामिल लोगों का एनकाउंटर कब होगा?
शालिनी सिंह पटेल
प्रदेश उपाध्यक्ष, जनता दल (यूनाइटेड), उत्तर प्रदेश एवं बुंदेलखंड प्रभारी
अयोध्या।राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। इसलिए यदि राम मंदिर से जुड़े चंदे या चढ़ावे में किसी भी प्रकार की कथित वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते हैं, तो यह केवल धन का नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का भी विषय है। मेरा सवाल सरकार से बिल्कुल स्पष्ट है—यदि कोई भी व्यक्ति कानून की नजर में दोषी पाया जाता है, तो क्या उसके खिलाफ भी वही निष्पक्ष और समान कानूनी कार्रवाई होगी जो एक आम नागरिक के खिलाफ होती है? या फिर कानून व्यक्ति की हैसियत, राजनीतिक प्रभाव और पहचान देखकर अपना स्वरूप बदल लेता है? कुछ लोग हर सवाल पूछने वाले को धर्म विरोधी बताने लगते हैं, जबकि मैं स्पष्ट कहना चाहती हूँ कि भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना भगवान श्रीराम, सनातन धर्म या किसी आस्था का विरोध नहीं है। भगवान के नाम पर यदि कोई गलत करता है, तो उस पर सवाल उठाना ही सच्ची श्रद्धा और धर्म के प्रति ईमानदारी है। हम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दल हैं, लेकिन गठबंधन का अर्थ यह नहीं कि भ्रष्टाचार, अन्याय या जनता के साथ हो रही किसी भी गलत बात पर चुप्पी साध ली जाए। लोकतंत्र का मतलब सत्ता की चाटुकारिता नहीं, बल्कि सत्ता से जवाब मांगना है। मैं किसी की गुलामी नहीं करती, न अंधभक्ति करती हूँ। मैं सही को सही और गलत को गलत कहने में विश्वास रखती हूँ। मैं आम को आम कहती हूँ, इमली नहीं; गेहूँ को गेहूँ कहती हूँ, चना नहीं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कहा था, "सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी, मगर यह देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।" यही लोकतंत्र की आत्मा है। इसलिए जनता के हित में सवाल पूछना न अपराध है, न धर्म विरोध। मेरी लड़ाई किसी धर्म या भगवान के खिलाफ नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार, दोहरे मापदंड और जवाबदेही की कमी के खिलाफ है। कानून का राज तभी मजबूत माना जाएगा, जब वह हर व्यक्ति पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू होता हुआ दिखाई दे।

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