बांदा। जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाने वाली जेडीयू नेत्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता शालिनी सिंह पटेल ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के नेताओं-कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं अथवा आम नागरिकों को घर में नजरबंद किए जाने की कार्रवाई के पीछे स्पष्ट कानूनी आधार बताया जाना चाहिए।
शालिनी सिंह पटेल ने सवाल किया कि यदि किसी व्यक्ति को हाउस अरेस्ट या घर से बाहर निकलने से रोका जा रहा है, तो पुलिस यह स्पष्ट करे कि यह कार्रवाई किस कानून, किस वैधानिक आदेश और किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल करना अपराध नहीं है। रोजगार, शिक्षा, महिला सुरक्षा, दिव्यांगों के अधिकार, बिजली, पानी, सड़क, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और जनता के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
जेडीयू नेत्री ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। हालांकि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई वैधानिक कार्रवाई आवश्यक है, तो पुलिस को उसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि यदि किसी नागरिक के खिलाफ कोई अपराध है तो मुकदमा दर्ज किया जाए, कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और आवश्यकता होने पर न्यायालय के समक्ष मामला रखा जाए। लेकिन बिना स्पष्ट कानूनी आधार बताए किसी व्यक्ति को घर में रोकना या उसकी आवाजाही प्रतिबंधित करना गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा, “पुलिस का काम कानून लागू करना है, कानून बनना नहीं। पुलिस का काम व्यवस्था संभालना है, जनता की आवाज दबाना नहीं।”
उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस से सीधा सवाल करते हुए कहा कि आखिर वह बताए कि किसी व्यक्ति को घर में नजरबंद करने के लिए किस धारा, किस कानून और किस सक्षम आदेश का सहारा लिया जा रहा है।
शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछने वालों को दबाने के बजाय उनके सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्दी कानून से बड़ी नहीं है और कोई भी कार्रवाई संविधान तथा विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप ही होनी चाहिए।
उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस से मांग की कि यदि किसी व्यक्ति की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है तो उसके पीछे मौजूद कानूनी आधार और आदेश को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।
फिलहाल शालिनी सिंह पटेल के इस बयान ने पुलिस की कार्रवाई, नागरिक स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को लेकर बहस को तेज कर दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि संबंधित पुलिस प्रशासन इन आरोपों और सवालों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है।

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