माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं डीजीपी महोदय बताएं — बांदा में कानून सबके लिए समान है या अलग-अलग? शालिनी सिंह पटेल।
संपादक गिरजा शंकर अवस्थी
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार कानून व्यवस्था को मजबूत करने और जनता को समान अधिकार देने की बात करती है, लेकिन बांदा जनपद में जो स्थिति देखने को मिल रही है वह कई सवाल खड़े करती है। अगर पुलिस विभाग के लोग रिक्शा में बैठकर पूरे शहर में घूम सकते हैं, प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी जा सकते हैं।
तो फिर आम जनता को क्यों रोका जाता है? बुजुर्ग, बीमार महिलाएं, दिव्यांग और आम नागरिक अगर रिक्शा से कहीं जाना चाहें तो उन्हें नियमों का हवाला देकर रोक दिया जाता है, लेकिन वही नियम पुलिस कर्मियों पर लागू नहीं होते। जब इस विषय में पुलिस अधीक्षक बांदा से फोन के माध्यम से शिकायत की गई तो जवाब मिला कि “वो पुलिस वाले हैं।
नए और यंग लोग हैं, इसलिए पैदल नहीं जाएंगे।” यह जवाब आम जनता के मन में कई प्रश्न खड़े करता है। क्या कानून अब व्यक्ति देखकर लागू होगा? क्या अधिकारी और पुलिसकर्मी आम जनता से अलग हैं? क्या नियम सिर्फ गरीब और आम लोगों के लिए बनाए गए हैं? पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि इंसानों में भी फर्क किया जा रहा है। अगर कोई इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है तो कहा जाता है कि “शालिनी पटेल हमेशा लड़ती रहती है।”
लेकिन जब तक जनता के अधिकारों के साथ भेदभाव होगा, तब तक आवाज उठती रहेगी। यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि समान अधिकार और न्याय की लड़ाई है। उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं डीजीपी महोदय से निवेदन है कि बांदा जनपद के अधिकारियों से जवाब लिया जाए कि आखिर कानून सबके लिए समान क्यों नहीं दिखाई दे रहा है। जनता सिर्फ सम्मान और समान व्यवहार चाहती है।

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