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माताटीला बांध परिसर में ‘बांध सुरक्षा सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम’ आयोजित, विशेषज्ञों ने बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 और जल संरक्षण पर दी जानकारी

जनपद ललितपुर के माताटीला बांध परिसर में बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना के अंतर्गत “बांध सुरक्षा सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम” का भव्य आयोजन किया गया।




 कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के जलशक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस अवसर पर श्रम एवं सेवायोजन राज्य मंत्री मनोहर लाल पंथ, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, एमएलसी रमा निरंजन, भाजपा जिलाध्यक्ष हरीशचन्द्र रावत, सांसद प्रतिनिधि दिनेश गोस्वामी सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, शोधार्थी छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य बांध सुरक्षा के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाना, संभावित आपदाओं के प्रति तैयारियों को मजबूत करना तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम की शुरुआत जल संरक्षण, जलस्रोतों की सुरक्षा और बांधों की सुरक्षा के प्रति सामूहिक संकल्प के साथ की गई।



मुख्य अतिथि जलशक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने अपने संबोधन में कहा कि बांध केवल जल संग्रहण की संरचना नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जीवनरेखा हैं। उन्होंने कहा कि बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बांधों से जुड़े सुरक्षा मानकों, आपदा प्रबंधन व्यवस्था और चेतावनी प्रणालियों के प्रति जागरूक रहें तथा नदियों और जलाशयों में कूड़ा-कचरा न डालें।
कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में वक्ता ने बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि यह अधिनियम बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इसके अंतर्गत बांधों के नियमित निरीक्षण, रखरखाव, सुरक्षा मानकों तथा आपातकालीन कार्ययोजनाओं की स्पष्ट व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि बांध सुरक्षा के लिए केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की जागरूकता और सहभागिता भी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने “जल रक्षति रक्षितः” का संदेश देते हुए कहा कि जब हम जल की रक्षा करते हैं, तब जल हमारे जीवन की रक्षा करता है। कार्यक्रम में देश में मौजूद बांधों की संख्या, 100 वर्ष से अधिक पुराने बांधों, वर्षा, सिंचाई और जल संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
इस दौरान एनडीएसए के तकनीकी विशेषज्ञ समीर शुक्ला ने बांध सुरक्षा से जुड़े तकनीकी पहलुओं, जल स्तर निगरानी प्रणाली, आपातकालीन चेतावनी तंत्र तथा बांध टूटने की स्थिति में संभावित प्रभावों की जानकारी दी। इसके साथ ही विशेषज्ञों ने डीआरआईपी परियोजना, आपदा प्रबंधन ढांचे, संभावित जलमग्नता मानचित्र, मौसम पूर्वानुमान, बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली तथा उपग्रह एवं जीआईएस तकनीक के उपयोग पर भी जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के दौरान आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अंकुर श्रीवास्तव के नेतृत्व में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसमें संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, सुरक्षित निकासी प्रक्रिया और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का व्यवहारिक प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त डॉ. नीति शास्त्री ने किया। इस अवसर पर डॉ. अंबुज द्विवेदी, जीएसआई के डायरेक्टर हेमंत कुमार, सीडब्ल्यूसी के असिस्टेंट डायरेक्टर देवेन्द्र कुमार, आईएमडी के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह, एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट नीरज राय, अधिशासी अभियंता भूपेश सुहेरा, पंकज सिंह, शैलेश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार राजेश तिवारी, भूपेंद्र राहुल, अमित बबेले तथा जिला सूचना अधिकारी डीएस दयाल सहित अनेक अधिकारी, विशेषज्ञ और शोधार्थी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया कि बांध सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और जल संरक्षण ही भविष्य की सुरक्षा की कुंजी है।

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